Home विशेष भारतीय सेना द्वारा कोरोना के विरुद्ध युद्ध में योगदान

भारतीय सेना द्वारा कोरोना के विरुद्ध युद्ध में योगदान

by News-Admin

 भारतीय सेना देश की सीमाओं की सुरक्षा  के साथ साथ देश में आने वाली आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप, कानून व्यवस्था तथा आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर कानून की नियत प्रक्रिया के अनुसार अपनी सहायता सिविल प्रशासन को प्रदान करती है ।  परंतु पहली बार कोरोना जैसी महामारी के समय भारतीय सेना ने बिना सिविल प्रशासन के मांगे अपना भावनात्मक स्वरूप दिखाते हुए कोरोना के विरुद्ध लड़ने वाले योद्धाओं के प्रति 3 मई को पूरे देश में सम्मान दिवस मनाया है । इसके अंतर्गत थल वायु तथा जल सेना ने अपने-अपने कौशल के अनुसार यह सम्मान प्रकट किया है । वायु सेना ने पूरे देश में उत्तरी छोर से दक्षिण एवं पूर्वी से पश्चिमी छोर तक हवाई जहाजों से फ्लाईपास्ट करके कोरोना योद्धाओं को सलामी दी थी । इसी प्रकार वायुसेना  के हेलीकॉप्टरों से देश के ज्यादातर जिलों के अस्पतालों जिनमें  कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा था उन पर पुष्प की वर्षा करके कोरोना योद्धाओं तथा मरीजों का मनोबल ऊंचा किया । इसके साथ-साथ थल सेना ने 3 मई को ही हर राज्य में शहीद पुलिसकर्मियों के यादगार स्थलों पर पुष्प चक्र अर्पित करते हुए सलामी दी । इसके साथ साथ जिन अस्पतालों में कोरोना मरीजों का इलाज हो रहा था उनके पास सैनिक बैंड से धुन बजाकर कोरोना योद्धाओं का सम्मान किया है । जल सेना के युद्ध पोतों ने तटवर्ती  कोरोना अस्पतालों  के सामने युद्ध पोतों  की रोशनी से उन्हें सम्मान दिया । सेना के तीनों अंगों ने कोरोना योद्धाओं को सम्मान प्रकट  करके देश को यह भरोसा दिलाया  कि सेना केवल नियम कानूनों से ही संचालित नहीं होती है बल्कि वे देश की भावना के अनुसार भी देश सेवा में हर समय तैयार है । कर्तव्य तथा भावना में सबसे बड़ा अंतर होता है कि कर्तव्य निभाना हर व्यक्ति के लिए जरूरी होता है परंतु भावना एक ऐसा विचार है जो व्यक्ति श्रद्धा के रूप में अर्पित करता है  और इसी श्रद्धा को देश के प्रति सेना ने प्रदर्शित किया ।

                 सेना की कार्यप्रणाली भारतीय सेना नियमावली ( डिफेंस सर्विस रेगुलेशंस) तथा सैनिक कानून ( मैनुअल ऑफ मिलिट्री लॉ) द्वारा नियंत्रित होती है, इन दोनों को देश की लोकसभा ने पारित किया है । इन दोनों पुस्तकों में सिविल प्रशासन  को प्राकृतिक आपदाओं एवं कानून व्यवस्था में सहायता करने के नियम कानून दिए हैं ।  जिनके द्वारा सेना अपने अनुशासित रूप के अनुसार सिविल प्रशासन तथा जनता की सहायता करती है । परंतु इनमें भावना प्रकट करने तथा कोरोना महामारी के समय इस प्रकार देश का मनोबल बढ़ाने तथा सम्मान प्रकट करने का कोई प्रावधान नहीं है । परंतु भारतीय सेना  के तीनों अंगों ने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद पहली बार इस प्रकार का सम्मान प्रकट किया है और देश का मनोबल ऊंचा किया है ।  सम्मान प्रकट करने के साथ-साथ सेनाओं ने कोरोना पीड़ितों के इलाज में भी अपने स्वास्थ्य कर्मियों और सैन्य अस्पतालों की सेवाएं अर्पित की हैं । इसके लिए सेना ने 19 सैनिक अस्पतालों में कोरोना मरीजों के लिए इलाज  और 4182 आईसीयू बिस्तरों की व्यवस्था भी की है जिससे गंभीर मरीजों को पूरी देखभाल की जा सके । इसके अतिरिक्त 31 अस्पतालों तथा 4856 अतिरिक्त आईसीयू बेड की भी व्यवस्था की जा रही है । उपरोक्त सहायता के साथ-साथ भारतीय वायु तथा नौसेना विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की स्वदेश वापसी की व्यवस्था भी अपने हवाई तथा जल के जहाजों से कर रही है ।  

                  देश का दुश्मन पाकिस्तान इस कोरोना संकट के समय भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है । उसने इस समय भी कश्मीर घाटी में दोबारा से आतंकी गतिविधियों को और बढ़ा दिया है । इसके लिए उसने पूर्व में समर्पण किए हुए आतंकियों एवं कश्मीर घाटी के लश्कर, हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे मोहम्मद के आतंकियों को मिलाकर एक नया संगठन द रजिस्टेंस ग्रुप नाम से खड़ा किया है ,जिससे वह अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को कह सके कि यह आतंकवाद कश्मीरियों का खुद का चलाया हुआ है और इसमें उसका कुछ सहयोग नहीं । इन्हीं आतंकियों ने कश्मीर के हंदवाड़ा में अचानक 1 मई को हमला किया  जिसके विरुद्ध लड़ते हुए भारतीय सेना के कर्नल  आशुतोष शर्मा, मेजर अनुज सूट  अपने 2 सैनिकों के साथ शहीद हो गए ।  इसी क्रम में 4 मई को इसी क्षेत्र में सीआरपीएफ के 3 जवान भी वीरगति को प्राप्त हो गए । परंतु भारतीय सेना ने घाटी में लंबे समय से आतंकी गतिविधियों के सरगना हैदर तथा रियाज  नायकू को  अभियान चलाकर खत्म कर दिया है । रियाज  के ऊपर भारत सरकार ने 12 लाख का इनाम घोषित कर रखा था । इस प्रकार भारतीय सेना इस समय भी आतंकवाद के विरुद्ध पूरी तरह सजग एवं हर प्रकार से तैयार है । हालांकि पाकिस्तान की आईएसआई धारा 370हटने  के बाद घाटी में आतंकवाद को सक्रिय रखने के लिए नई-नई चाले आजमा रही है । इसके अलावा उसको कोरोना का आतंक फैलाने के लिए पाकिस्तान कोरोना संक्रमित आतंकियों को कश्मीर में घुसपैठ कराने की कोशिश कर रहा है परंतु सेना तथा केंद्रीय सशस्त्र बल उसको इसमें सफल नहीं होने देंगे ।  

              भारतीय सेना देश की सुरक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारीको  समझते हुए हर परिस्थिति में वह अपने आप को स्वस्थ तथा सक्षम रखती है । जिससे आवश्यकता पड़ने  पर हर परिस्थिति में वह देश की सुरक्षा में तैयार रहें । इसके लिए सेना  अपने कठोर अनुशासन और नियम कानूनों से स्वयं को तरह-तरह की संक्रमित बीमारियों से बचाती रहती है । इसकी गंभीरता इस तथ्य से मापी जा सकती है कि सेना का कमान अधिकारी अपने आधीन जवानों के स्वास्थ्य  का जिम्मेदार होता है ।  इसलिए कमान अधिकारी हर समय स्वास्थ्य तथा अन्य सावधानियों के प्रति सजग रहता है  और  सैनिक कानून द्वारा  उसे अधिकार प्राप्त है कि वह इन नियम कानून की अवहेलना  करने वालों को तुरंत सजा दे सके । उपरोक्त सेना के प्रावधानों का सत्यापन कोरोना के आंकड़ों  से लगाया जा सकता है । जहां देश में जगह-जगह कोरोना के नए मरीज  पाए जा रहे हैं और देश  के केंद्रीय सुरक्षाबलों में भी इसके मरीज पाए गए हैं वहीं पर 13 लाख की संख्या वाली भारतीय सेना में अब तक केवल 98  मरीज ही पाए गए  जिनमें 40 ठीक हो चुके हैं । जबकि सेना के जवान बैरक में एक साथ रहते हैं । सेना में संक्रमित बीमारियों के विरुद्ध कदम उठाने का इतिहास  बहुत पुराना है । दूसरे  विश्व युद्ध के समय बर्मा युद्ध क्षेत्र में वहां की स्थानीय भौगोलिक स्थिति के कारण मच्छरों का प्रकोप था  इसलिए उस क्षेत्र में मलेरिया महामारी का रूप ले चुका था ।  इस स्थिति में सेना तथा देश में एक कहावत  कहीं जाती थी की यदि दुश्मन की गोली से एक सैनिक शहीद होता है तो वहीं पर मलेरिया से 3 सैनिक मारे जाते हैं । इस स्थिति में सेना ने अपने अनुशासन से मलेरिया रूपी महामारी पर विजय प्राप्त की तथा अपने आप को सक्षम तथा स्वस्थ रखकर दुश्मन को भी हरा दिया । भारतीय सेना मलेरिया के विरुद्ध उसी प्रकार के उपाय  लंबे समय से अपना रही है जिस प्रकार से कोरोना  के विरुद्ध सोशल डिस्टेंसिंग तथा घरों में रहने के उपाय किए जा रहे हैं ।  सेना में अभी भी स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही करने वाले सैनिकों के विरुद्ध तुरंत कानूनी कार्यवाही की जाती है ।  जिससे उनके अंदर अनुशासन और भी मजबूत हो और वह स्वस्थ रहकर हर परिस्थिति में देश पर आने वाली मुसीबतों में इनके विरुद्ध देश की सहायता और लड़ाई के लिए तैयार रहें ।

               भारतीय सेना के इस आपसी समन्वय और भावनात्मक स्वरूप के पीछे केंद्रीय सरकार द्वारा तीनों सेनाओं के बेहतर तालमेल तथा एकीकरण के लिए उठाया गया वह कदम है जिसके द्वारा सरकार ने चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद का निर्माण किया और इस पर भूतपूर्व सेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत को नियुक्त किया । जनरल रावत एक अनुभवी सैन्य अधिकारी हैं तथा उन्होंने थल सेना का सफलतापूर्वक संचालन किया । उनके समय में सेना ने कश्मीर में आतंकी गतिविधियों पर सफलतापूर्वक विजय प्राप्त कीथी तथा धारा 370 हटने के बाद कश्मीर की स्थिति को संभाला ।  चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ पद के निर्माण से पहले तीनों सेनाओं के अंदर आपसी तालमेल के लिए कोई सैन्य अधिकारी नहीं था ।  यह तालमेल केवल रक्षा मंत्रालय के ब्यूरोक्रेट्स के द्वारा ही किया जा रहा था जो रक्षा मामलों  एवं सेनाओं की गरिमा एवं नियम कानून के बारे में इतने अनुभवी नहीं होते हैं जितना एक सैन्य अधिकारी स्वयं होता है । इसलिए अब चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ तीनों सेनाओं के लिए साजो सामान  हथियार इत्यादि की खरीद को नियंत्रित करेंगे  इसके अतिरिक्त उपलब्ध साजो सामान तथा सुविधाओं का पूरी तरह से इस प्रकार उपयोग में लाएंगे जिससे इनके दोहरीकरण से बचा जा सके और रक्षा बजट में उपयोग के लिए और ज्यादा धन उपलब्ध हो सके ।

               हालांकि सैनिक सम्मान अमेरिका में भी किया गया है परंतु इसके लिए अमेरिका में पूरे 1 महीने की तैयारी की गई थी परंतु भारतीय सेना ने यह सब केवल 1 दिन के नोटिस पर करके दिखा दिया, जो यह प्रदर्शित करता है कि भारतीय सेनाएं हर समय देश की सेवा एवं सम्मान तथा इसके मनोबल के लिए सजग एवं तैयार हैं ।

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